Monday, October 3, 2011

aab

हमने उजड़ी बस्ती देखी,
फना होती हस्ती  देखी.
हर शै बहुत ही महंगी,
सिर्फ जिंदगी सस्ती देखी.
महंगाई ने सब को मारा,
नागिन बन के डसती देखी.
सावन के महीने में भी,
हमने आग बरसती देखी.
गुमां जिसको होता ज्यादा,
उसकी डूबती कश्ती देखी.
आशिक, रिन्द, दीवानों में,
हमने बेइंतहा मस्ती देखी.
सावन के महीने में भी,
गजब की आग बरसती देखी.
"रैना"आब की तलाश में,
सागर की माँ भटकती देखी.
राजिंदर शर्मा  "रैना"

jab se

जब से तूने मझदार में तन्हा छोड़ा है,
बेदर्दी से मेरे शीशा ए दिल को तोडा है,
तब से मेरा जीना तो हराम हो गया है,
मेरा हमसफर, साथी  जाम हो गया है,
तूने निकाल फैँका मुझे अपने दिल से,
फिर भी तेरी चर्चा मेरा काम हो गया है.
हम तो जी रहे इक गुमनाम जिन्दगी,
तेरी मेहरबानी "रैना"सरेआम हो गया है. 

Sunday, October 2, 2011

teri bhakti

जय माँ अम्बे
 माँ की भेंट 
तेरी भक्ति में माँ अम्बे मैंने जीवन है बिताना,
भटकू गा अब न मैं तो मुझे मिल गया ठिकाना.
तेरी भक्ति में माँ------------------------------
पापी हूँ मैं तो अम्बे,मैंने पाप ही किये है,
नही  बात तेरी मानी, तुझे दर्द ही दिये है,
खता मफ़ा मेरी करना, मुझे चरणों से लगाना. 
तेरी भक्ति में माँ------------------------------
भक्तों का मइया तूने, बेड़ा तो पार किया है,
कोई खाली नही लौटाया,मुहु माँगा वार दिया है,
कही भव में  न डूब जाऊ, आकर मुझे बचाना.
तेरी भक्ति में माँ------------------------------"रैना"

Saturday, October 1, 2011

gandi

इसलिए तो 
अमर गाँधी का नाम है,
एक गाल पे थपड खा कर,
 दूसरा गाल आगे कर देना,
क्या कोई आसान काम है."रैना"

sahara

माँ की भेंट 
शेर 
इक मुद्दत से परेशान हूँ, तेरे दर का पता नही मिलता,
मैं अब जाऊ तो कहां जाऊ,तेरे घर का पता नही मिलता

जो मइया तेरा सहारा मिल जाये,
डूबते को किनारा मिल जाये.
मिट जायेगे सारे रंजों गम,
हर हसीं वो नजारा मिल जाये.
जो मइया तेरा  -----------
फिर राहों में  न भटकू गा,
न दुनिया की आँखों में खटकूगा,
सुख चैन से कट जाये जिन्दगी,
न चिन्ता  की फांसी लटकू गा.
जो मइया तेरा  -----------
कोई  संगी है न साथी है,
इक तेरा भरोसा बाकी है,
अब लाज मेरी भी रख लेना,
तुने दीनो की लाज तो राखी है. 
जो मइया तेरा-----------"रैना"
जय माँ अम्बे---------------------------





kyo

क्यों करते हो ख्वाहिश मोहब्बत की,
इस मोहब्बत ने कई घर बर्बाद किये है,"रैना"
सुबह निकली शाम में ढलती जाये,
ये जिन्दगी यूँ ही निकलती जाये,
रफ्तार सुइयों की कम नही होती,
रफ्ता रफ्ता शमा पिगलती जाये,
फ़िक्र यहाँ का वहां का जिक्र नही, 
उलझ के बिगड़ी बिगड़ती जाये.
भटका राह से "रैना" कुछ गौर कर,
रेत हाथों से निरंतर फिसलती जाये."रैना"