Saturday, August 4, 2012

kamlog jirhe kuchh

 कम ही जीते कुछ करने को,
ज्यादा जीते है मरने को,
जीवन दो पल ऐसे न बिता,
नाम रहे कुछ ऐसा कर जा. "रैना"     

apne ghar men bhi

 अब तो हादसे पेश आ रहे ऐसे,
 अपने घर में रहते अजनबी जैसे,
जीने की कोई ख्वाइश तो नही है,
उसकी मर्जी के बिना हम मरे कैसे."रैना" 
अन्ना जी अब देश भक्ति की आग में ज्यादा न जलो,
अपना लौटा कटोरी उठाओ अपने घर की तरफ चलो,
तुम्हारी टीम ने ही तुम्हारा काम तमाम  कर दिया है,
जी लोगों को जिसका अंदेशा था वही काम कर दिया है."रैना"    

tab naina aansu barsane lge

जब दिल के घर से सामान उठाया,
आँखों ने जम के पानी बरसाया,
फिर हमने भी अपनी जिद्द न छोड़ी,
दोबारा से दिल का घर न सजाया. "रैना"  

mujhe nsib n hui khushi yaro

काश मिले कोई हंसाने वाला,
उजड़े घर में दीप जलाने वाला.
भटके है इस बस्ती के बाशिंदे,
आये  कोई राह दिखाने वाला. "रैना "

tere didar ki talb rhtihai

 दीदार की तलब रहती है,
आँखों से नदिया बहती है. 
तू बेखबर दर्द नही समझे 
जान लाखों दुःख सहती है."रैना "
    

Friday, July 27, 2012

diya to sab kuchh

दिया सबकुछ मगर कुछ फर्क छोड़ा,
हँसा हँसा के तुने नाजुक दिल  तोड़ा.
गिला तुझसे भला हम करते भी  कैसे,
तेरी मेहरबानी जो गम से रिश्ता जोड़ा।"रैना"