Thursday, June 2, 2011

gardish

गर्दिश के दिनों में अपने भी बददुआ देते,
गर्मी के मौसम में जैसे पंखे गर्म हवा देते.
कमबख्त हुस्न वालो की अजीब फितरत,
पलकों पे बैठा फिर पैरों में गिरा देते.
मेरे दिल में बना है खूब अक्श तेरा,
मुनासिव होता सीना चीर दिखा देते.
असर दौलत का इस कदर हुआ हावी.
अपने लख्ते जिगर सरेआम दगा देते.
"रैना" काश ये तो मुमकिन हो जाता,
दिल से बेदर्द की तस्वीर तो हटा देते. "रैना"

Friday, May 20, 2011

shabab

वीरान यादों की बस्ती पे शबाब आया है,
जब से गई रात को उनका ख्वाब आया है. "रैना"

Sunday, May 15, 2011

गर वो मेरा गमगुसार हो जाये,
फिर तो जिन्दगी बहार हो जाये.
बंद खुली आँखों से जिसे देखू,
मेरा वो सपना साकार हो जाये.
मर्जे इश्क का असर तो देखो,,
हरपल बैचैन दिल बेक़रार हो जाये.
रूठ के तू जो फेर लें आँखें,
फिर तो जिन्दगी गमार हो जाये.
इक मुद्दत से जो मझधार में भटके,
तेरा इशारा सफीना पार हो जाये.
तन्हा बैठा उम्मीदें है पाल रखी,
इंतजार तेरा अब दीदार हो जाये.
अब तलक गुजरी है वीराने में,
नजर तेरी चमन गुलजार हो जाये.
"रैना"
गमगुसार=हमदर्द, 
 गमार = गम का घर ,ढेर

Sunday, May 8, 2011

maa

मदर डे के उपलक्ष में माँ को समर्पित
माँ तूं महान है,
तुझी से रोशन जहान है.
तेरे चरणों में जन्नत,
तू अल्ला ताला भगवान है.
माँ तू महान है.
तू ही अंधकार मिटती है,
ये रोशन जहान दिखाती है,
फिर अपना दूध पिलाती है,
ममता की गंगा बहती है,
कभी मानती न एहसान है.
माँ तू महान है.
लाखों दुःख जरती हो,
कभी उफ़ न करती हो,
बच्चे के खातिर जीवन तेरा,
बच्चे के खातिर मरती हो,
बच्चे की ख़ुशी को माने शान है.
माँ तू महान है.
बच्चों में बांटे सुख है,
मगर तेरे हिस्से में दुःख है,
फिर भी बदले न रुख है,
चाहे बच्चा देता दुःख है,
विचलित न होता तेरा ध्यान है.
माँ तू महान है. "रैना"


Saturday, April 30, 2011

kale angrej

भ्रष्टाचार का सूरज अब ऐसे न ढलेगा,


सिर्फ

भारत माँ की जय कहने से काम न चलेगा,

अब बसंती चोला फिर रंगवाना पड़ेगा,

वीरो को खून तो बहाना पड़ेगा,

तभी काले अंग्रेज काबू आयेगे,

यदि हम नही संभले तो

ये भारत को स्विस बैंक में गिरवी धर आयेगे. "रैना"

Sunday, April 10, 2011

suraj

अँधेरे में उजाले की तलाश करते रहे,
हम महफ़िल में चिराग़ बन जलते रहे.
वो पत्थर दिल फिर भी नही पिगले,
हम तो शमा के मान्निद पिगलते रहे.
साकी ने पिलाया है कुछ जाम ऐसा,
हम तो निरंतर गिरते संभलते रहे.
बेशक मंजिल है बिल्कुल पास मेरे,
फिर भी हम दिन रात चलते रहे.
मुझे लूटने वाला न कोई और है,
हम तो खुद को खुद ही छलते रहे.
हमने घबरा के हार नही मानी,
वैसे उम्मीद के सूरज ढलते रहे.
"रैना" दिल पे लगे जख्म लाखों,
फिर भी अरमां के बच्चे पलते रहे. "रैना"

Saturday, April 9, 2011

हम सारा हिंदुस्तान  तेरे नाम करते,
अन्ना तेरी हिम्मत को प्रणाम  करते है.
हजारे तेरे सहास को सलाम करते है.
अजब कमाल का तुने सेतु बनाया है,
समस्त भारत को इक सूत्र में पिरोया है,
देश की सोई हुई जनता को जगाया है.
वाह बहुत खूब  तेरा  निराला अंदाज है,
तूं तो अब  हर भारतीय की आवाज है.
तेरे सर पे  महत्मा  गाँधी का ताज है.
हमें विस्वास  कदम पीछे न हटाओगे,
भारत देश  को भ्रष्टाचार मुक्त बनवाओगे
देश से अब काले अंग्रेजों को भागोगे.
हर मुशिकल में हम सब तुम्हारे साथ है,
अन्ना तुम अकेले नही तुम्हारें साथ करोड़ो हाथ है. 
                        राजिंदर " रैना' पत्रकार