Wednesday, July 20, 2011

jina

ina te aesa jina 
jida charcha dur dur tak hove,
jdo shahar vicho rukhsat ho jawa,
sun dushman vi chham chham rove. "raina"

Monday, July 11, 2011

dard dafan

मुझे संकोच नही ये बताने में,
दर्द दफ़न दिल के तहखाने में.
वो फिर भी मेरे ख्वाबों में आते,
उमर गुजरी है जिन्हें भुलाने में.
पीने वालो जरा संभल के पीना,
जहर बिकता है अब मयखान में.
तलब थी तुझे आखिरी बार देखू,
मगर देर कर दी  तूने आने में.
ढूढने से भी नही मिलेगा तुझे,
मुझ सा आशिक नही ज़माने में.
तड़फ परवाने की तो वही समझे,
"रैना"मजा आता खुद कों जलाने में.  "रैना"

Sunday, July 10, 2011

ishk

इश्क मोहब्बत में दर्दो बेकरारी है,
इस खेल में बस बेचारी लाचारी है.
प्यार वफा की बात पीछे छुट गई,
पाक मोहब्बत पे अब मतलब भारी है.
सोच समझ के करना सौदा दिल का,
हर शख्स बस्ती का सुलझा व्यापारी है.
मौसम का असर है दिल पे नही काबू,
दिन यहां गुजरा रात वहां पे गुजारी है.
"रैना"का मशवरा इश्क हकीकी कर,
चिंता फिकर न कोई सफल तैयारी है.

Saturday, July 9, 2011

safar

तय किया लम्बा सफ़र पैर थकने लगे है,
डर सा लगा रहता बाल पकने लगे है.
गर्दिश के दिनों का बुरा असर देखा,
तन्हा छोड़ अपने भी पीछे हटने लगे है.
जिन्हें मैंने समझा अपना जानी दुश्मन,
गर्दिश के दिनों में वो मुझे अपने लगे है.
घुमने के बहाने ही मेरे गांव चले आओ,
बाग में अब पेड़ों से आम टपकने लगे है.
छोड़ी नही उन्होंने अभी वो पुरानी आदत,
मुझे देख कर के जुल्फे झटकने लगे है.
कभी बसते थे हम उनकी आँखों दिल में,
अब हम उनकी आँखों में खटकने लगे है.
वक्त का तकाजा है या मौसम का असर,
लोग आखिरी दिनों में भी भटकने लगे है,
सहे लाखों फिर भी हिम्मत नही हारी,
"रैना" तभी गम के बादल छटने लगे है.

Thursday, June 2, 2011

gardish

गर्दिश के दिनों में अपने भी बददुआ देते,
गर्मी के मौसम में जैसे पंखे गर्म हवा देते.
कमबख्त हुस्न वालो की अजीब फितरत,
पलकों पे बैठा फिर पैरों में गिरा देते.
मेरे दिल में बना है खूब अक्श तेरा,
मुनासिव होता सीना चीर दिखा देते.
असर दौलत का इस कदर हुआ हावी.
अपने लख्ते जिगर सरेआम दगा देते.
"रैना" काश ये तो मुमकिन हो जाता,
दिल से बेदर्द की तस्वीर तो हटा देते. "रैना"

Friday, May 20, 2011

shabab

वीरान यादों की बस्ती पे शबाब आया है,
जब से गई रात को उनका ख्वाब आया है. "रैना"

Sunday, May 15, 2011

गर वो मेरा गमगुसार हो जाये,
फिर तो जिन्दगी बहार हो जाये.
बंद खुली आँखों से जिसे देखू,
मेरा वो सपना साकार हो जाये.
मर्जे इश्क का असर तो देखो,,
हरपल बैचैन दिल बेक़रार हो जाये.
रूठ के तू जो फेर लें आँखें,
फिर तो जिन्दगी गमार हो जाये.
इक मुद्दत से जो मझधार में भटके,
तेरा इशारा सफीना पार हो जाये.
तन्हा बैठा उम्मीदें है पाल रखी,
इंतजार तेरा अब दीदार हो जाये.
अब तलक गुजरी है वीराने में,
नजर तेरी चमन गुलजार हो जाये.
"रैना"
गमगुसार=हमदर्द, 
 गमार = गम का घर ,ढेर