Saturday, March 3, 2012

kahte hai kathh ki hadi

कुछ समय पहले दोहराते थे मेरे यार,
काठ की हांडी तो नही चढ़ती बार बार,
मगर अब मुहावरा ही बदला सरकार,
काठ की हांडी ही चढ़ रही है बार बार,
भ्रष्टाचार की दीमक ने देश चट किया,
सारा सिस्टम ही पोलियो ग्रस्त बीमार.
भारत देश में दो जातियों का विस्तार,
नेता और गुरु उगे है जैसे खर पतवार.
 मसीहा की हालत देख हुए निठल्ले,
सब को बिना काम माया की दरकार.
चाहे चारों तरफ मचा हुआ कोहराम,
चांदी कूट रहे है  देखो धर्म के ठेकेदार,
अपने बोस को खुश करने के लिए नेता,
चमचागिरी के नित नये करते अविष्कार.
"रैना"देश को काले अंग्रेजों से बचाने के लिए,
आजादी की लड़ाई लडनी पड़े फिर इक बार......................."रैना"



अब दिल का रिश्ता पैसे से,
पैसे बिन प्यार नही सम्भव...."रैना"

इश्क दिमाग नही दिल करता,
 बुद्दिमान तभी इश्क न करते.. ."रैना"

dil ka rista

अब दिल का रिश्ता पैसे से,
काम दिमाग करे नाही है ..............
इश्क दिमाग नही दिल करता."रैना"

Friday, March 2, 2012

aatishe ishak me

आतिशे इश्क में सुर्ख रु हो जाऊ,
मैं न रह पाऊ सिर्फ तू हो जाऊ.
फिर तुम हो जाओ जुस्तजू मेरी,
काश मैं भी तेरी आरजू हो जाऊ."रैना"

itna kyo tdfate ho

तू इतना क्यों तड़फाता है,
पास रहे नजर न आता है.
मैं तुझको कैसे गैर कहू,
तू मेरी साँस चलाता है........"रैना"

shanti ki tlash me

शांति की तलाश में भटकता प्राणी,
निरंतर आशांति की और बढ़ रहा है,
कहां है शांति किधर है शांति,
उधर न इधर है शांति.
शांति दिल्ली न जलांधर है,
शांति मन के अन्दर है,
मन तो अमृत कुंड समंदर है.
जो इस समंदर में गोता लगता है,
उसको तो मोती मिल जाता है.
नही तो हम ताउम्र सीपियाँ इकठ्ठी करते रह जाते है,
रोते रोते आये,रोते रहे और रोते रोते ही जाते है.
आओ मोती तलाश करे........................................................"रैना"

tere ghar ka pta

तेरे घर का पता,
तू खुद आ के बता.
भटके राह दिखाने वाले,
साध बने भटकाने वाले.
भटके राह दिखाने........
बाबा के अन्दाज निराले,
उजले कपड़े दिल के काले.
अपना राग बजाने वाले.
भटके राह दिखाने..........
नाम धर्म का ले छल लेते,
बिन सोचे समझे चल देते,
है अनजान जमाने वाले.
भटके राह दिखाने............
"रैना" मैंने ये जाना है,
 मकसद तो  पैसा पाना है,
 सब है पेटू खाने वाले.
भटके राह दिखाने...................."रैना"