Sunday, September 30, 2012

दोस्तों एक और प्यारी, 
न्यारी ग़ज़ल पेशेखिदमत है।

तुझसे नैना यू न लड़े हैं,
हम तो सादेपन पे मरे हैं।
जीवन दे मौत तिरी मर्जी,
हाथों में कासा ले खड़े है।
राहे इश्क बड़ी ही मुशिकल,
इस रस्ते दिलदार चले हैं।
आदम न तभी मरना चाहे,
हर दिल में अरमान पले हैं।
अन्धेरा फिर तो छट जाता,
मन में जब भी दीप जले है।
साजन की याद बहुत आये,
"रैना"जब ये शाम ढले हैं। ..."रैना"

ye kli dobara

नेक कर्म से जीवन मिलता,
गुल दोबारा कम ही खिलता,
आओ जीवन को महकाये,
मकसद अपना सफल बनाये।
जोड़े सारे टूटे धागे,
मन में सोई उल्फत जागे।
मस्त हुये पी नाम प्याला,
रैना" फेरे मन की माला।  ...."रैना"
जय जय माँ अम्बे .......सुप्रभात जी

Saturday, September 29, 2012

ghri nind son chhode

गहरी नींद सोना छोड़े,
प्रभू चरणों से मन जोड़े।
काहे चिंता सौ वर्षों की,
जीवन के तो दिन हैं थोड़े।
शक्ल किसीकी देख न हंसना
उसके ही सब काले गौरें।
कैसे फिर कल्याण हो तेरा,
उसके के दर से मुख मोड़े।
रैना"उसको याद तू रखना,
मत सोना तू बेच के घोड़े। ....."रैना"

anhai me hamne

तन्हाई में हमने कुछ न करा है,
दिल के कोने में याद सजाई है,
रैना"तेरी याद वफा है करती
बस अफ़सोस यही तू हरजाई है।"रैना"

bewqt teri yad

बेवक्त तेरी याद ने दी दस्त्तक,
अफ़सोस मेरे पास रुमाल न,
आंसू पोछे तो कैसे।
आंसू रोके तो कैसे। ..."रैना" 

beasar har bdduaa

बेअसर हो  हर बददुआ
जो साथ में माँ की दुआ।
हर रोग तो जड़ से मिटे,
माँ की दुआ ऐसी दवा।
अब त्याग माँ का भूलते,
क्या इस जमाने को हुआ।
माँ से रखे वो फासला,
रैना"नही करता खता।

ik duje ko sab

मैंने इसको  तूने उसको,
जैसा मौका लगता जिसको,
इक  दूजे को सब ने लूटा,
ये तो सारा शहर है झूठा।
ये तो सारा ................
झूठे हैं ये खून के रिश्ते,
कोड़ी कोडी में अब बिकते,
जिसकी जेब भरी रहती है,
उसके साथ ही लम्बे टिकते।
जिसको वक़्त पटक मारे तो,
उससे अपना तन भी रूठा।
ये तो सारा ................
कहने को भीड़ लगा मेला,
बन्दा फिर भी तन्हा अकेला,
जिसने अपनी रूह को मारा,
वो ही अब दौलत में खेला,
देख जमाने की हालत को,
"रैना"का अब दिल है टूटा।
 ये तो सारा ................"रैना"