Friday, September 6, 2013

dil tuta drd huaa

दोस्तों देखना मेरा ये अंदाज

दिल टूटा पीड़ उठे रोते रात भर,
उनकी अदा देखो सोते रात भर।
दिन दिहाड़े लूटा बीच बाजार में,
गम से दो चार हम होते रात भर।
गुजरे लम्हें याद करके अक्सर,
आंसूओं से आंखे भिगौते रात भर।
गल्ती से जब कभी आंख लगती,
सपनों में फिर वो आते रात भर।
दुनिया को जल्दी अलविदा कहदे,
रैना"गम का भार जो ढोते रात भर। राजेन्द्र रैना गुमनाम"  

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