Sunday, September 8, 2013

sjna se ishk n

सजना से इश्क न हुआ याराना,
लगता फिर से वही आना जाना,
यहां भटकते रहे वहां पे तड़फे गे,
मैं बेवफा को न मिले ठिकाना।
लगता फिर से ………….
मुझे मजबूरी रही उससे दूरी रही,
उसको भुला रहा जो जरूरी रही,
वो कथा वो कहानी तो अधूरी रही,
झूठी बेवजह की मेरी मशहूरी रही,
फिर से आंसू बहाना पछताना।
लगता फिर से। ……………
रैना"तूने कभी कुछ सोचा नही,
बढ़ते कदमों को तूने रोका नही,
क्यों साजन को ऐसे भुला दिया,
यूं वादा करके तो ऐसे होता नही,
गुजरा वक्त न फिर वापिस आना।
लगता फिर से। …………. राजेन्द्र रैना गुमनाम"

2 comments:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार १० /९ /१३ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका वहाँ हार्दिक स्वागत है ।

    ReplyDelete
  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। ।

    ReplyDelete