Wednesday, December 21, 2011

sai ji kirpa kre

 साईं के दर्शन पाने को,पहले मैं को मिटाना पड़ता है,
दीन दुखियों गम के मारों को,सीने से लगाना पड़ता है.
साईं के दर्शन पाने को...........................................
अब छोड़ दे छल धोखा तू,कुछ करने को यहां आया है,
यहां अपना तेरा कोई नही,सारा शहर बेगाना पराया है,
ये सच उस पार जाने को,पहले खुद को डुबाना पड़ता है,

दीन दुखियों गम के मारों को,सीने से लगाना पड़ता है.
साईं के दर्शन पाने को...........................................
आजकल तो नाचने गाने को साईं की भक्ति कहते है,
बाबा के भजन गाने वाले बस पैसे की ताक में रहते है,
साईं के भजन गाने के लिए पहले खुद को तपाना पड़ता है.

दीन दुखियों गम के मारों को,सीने से लगाना पड़ता है.
साईं के दर्शन पाने को..........................................."रैना"




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