Tuesday, April 16, 2013

 कवियों की आसमान से ऊँची परवाज देखिये,
मधु की महफ़िल का अलग ही अन्दाज देखिये।
गीत ग़ज़ल छंद दोहे कविता की खुश्बू  महकती,
फेसबुक पे ही न समस्त विश्व में चारसू महकती।
बेशक मधु की महफ़िल तो  रचनाओं की खान है,
इसके हर कवि की अपनी शैली अलग पहचान है।
कुछ लोग तो लिखने के नाम पर पापड़ ही बेलते,
मगर इस ग्रुप के कवि निरन्तर लफ्जों से खेलते।
भगवन ग्रुप के कवियों को लफ्जों का धनी बना दे,
तारे के भांति मधुसुदन का नाम विश्व में चमका दे।"रैना"

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