Friday, April 19, 2013

soch ka

व्यंग्य कविता

खैर इस में न कोई तर्क वितर्क दोस्तों,
हो चूका हमारी सोच का बेड़ा गर्क दोस्तों,
दिलों में भर गया शैतानियत का जहर,
इंसानियत का बचा न अब अर्क दोस्तों।
बेटी को बचाने का चला रहे है अभियान,
भारत देश में बेटी का जीवन नर्क दोस्तों।
किसी की इज्जत लुटे या बचे क्या करना,
इन नेताओं को न पड़ता कोई फर्क दोस्तों।
हालात ऐसे बन गये "रैना'करे तो क्या करे,
गम गस्त करने को पीते चाय कड़क दोस्तों।"रैना"
सुप्रभात  जी  जय जय माँ जय जय माँ


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