Monday, April 15, 2013

gam to hai

दोस्तों लो प्यारी सी ग़ज़ल

गम है मगर कोई गिला नही,
फिर क्या हुआ जो वो मिला नही।
हैं फूल गुलशन में खिले बहुत,
वो गुल नसीबों का खिला नही।
माँ बाप अपने हाल से दुखी,
मिलता वफा का अब सिला नही।
मुश्किल बहुत ये इश्क की डगर,
आशिक का तो होता भला नही।
"रैना"कभी तू सोच रात की,
खुद से कभी क्यों तू मिला नही।"रैना"

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